समाचार
1 से 7 सितम्बर तक पोषण
आहार सप्ताह का आयोजन होगा
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विगत वर्षो की तरह इस वर्ष भी 1 से 7 सितम्बर के दौरान पोषण आहार सप्ताह का आयोजन किया जायेगा । इस सप्ताह के दौरान छ: माह के होने पर बच्चों को माँ के दूध के साथ ऊपरी आहार देने की शुरुआत और किशोरी बालिकाओं का पोषण पर जन जागरुकता लाने का प्रयास किया जायेगा। सभी आयोजनों में सामुदायिक सहभागिता ली जायेगी तथा आयोजन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, मीडिया, वरिष्ठ नागरिकों, अन्य विभागों, स्वयं सेवी संगठनों का भी सहयोग लिया जायेगा ।
जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास सुश्री स्वर्णिमा शुक्ला ने बताया कि जागरुकता गतिविधियों की कार्ययोजना के अन्तर्गत पर्यवेक्षकों के लिए आधे दिवस का उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित होगा जिसमें सप्ताह आरंभ होने के पूर्व छ: माह के होने पर बच्चों को माँ के दूध के साथ-साथ ऊपरी आहार देने की शुरुआत और किशोरी बालिकाओं का पोषण विषय पर जिले के सभी पर्यवेक्षकों के लिये आधे दिवस का उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा । इस आयोजन के लिए पावर पाइंट प्रेजेंटेशन और महिला एवं बाल विकास संचालनालय से प्राप्त फिल्म उपलबध करायी जायेगी । इसी प्रकार जिला मुख्यालय पर सप्ताह के दौरान कन्या विद्यालयों और महाविद्यालयों की छात्राओं के लिये पोषण गोष्ठी का आयोजन किया जायेगा। इस आयोजन में विषय विशेषज्ञों द्वारा छात्राओं को पोषण पर आधारित जानकारी दी जायेगी। इस कार्यक्रम के दौरान व्यंजन प्रतियोगिता, पोस्टर प्रतियोगिता, क्विज प्रतियोगिता एवं स्लोगन प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जायेगा तथा प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया जायेगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक परियोजना मुख्यालय पर सप्ताह के दौरान किसी भी दिन कन्या विद्यालयों और महाविद्यालयों की छात्राओं के लिए पोषण गोष्ठी का आयोजन किया जायेगा । इस आयोजन में स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों, पर्यवेक्षकों द्वारा छात्राओं को पोषण पर आधारित जानकारी दी जायेगी। स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर किशोरी बालिकाओं की स्वास्थ्य जाँच विशेष रुप से एनीमिया की जाँच करायी जायेगी तथा स्थानीय उपलब्ध संसाधनों जैसे वजन मशीन एवं ऊंचाई का चार्ट आदि की मदद से किशोरी बालिकाओं की बी.एम.आई. नापा जायेगी । इस जाँच के आधार पर किशोरावस्था में पोषण के महत्व पर छात्राओं को जानकारी दी जायेगी ।
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अभी तक 821.5 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज
जिले में अभी तक 821.5 मि.मी.औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है,जबकि गत वर्ष इस अवधि तक 782.6 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज की गई थी। जिले में पिछले 24 घंटों के दौरान प्रात: 8 बजे तक 10.9 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज की गई है जिसमें विकासखंड तामिया में 10 मि.मी., अमरवाड़ा में 8, चौरई में 3.6, हर्रई में 3.8, सौंसर में 8, पांढुर्ना में 8.2, परासिया में 51 और जुन्नारदेव में 27.4 मि.मी. वर्षा शामिल है।
अधीक्षक भू-अभिलेख द्वारा बताया गया कि जिले में 29 अगस्त तक 821.5 मि.मी.औसत वर्षा दर्ज की गई है जिसमें विकासखंड छिन्दवाड़ा में 774.4 मि.मी., मोहखेड में 730.2, तामिया में 980, अमरवाडा में 1213.4, चौरई में 729, हर्रई में 740.1, सौंसर में 721, पांढुर्ना में 898.2, बिछुआ में 604.7, परासिया में 876.1 और जुन्नारदेव में 812.8 मि.मी. वर्षा दर्ज की गई है।
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संयुक्त कलेक्टर श्री सक्सेना की पदस्थापना सौंसर में
कलेक्टर डॉ. पवन कुमार शर्मा द्वारा संयुक्त कलेक्टर श्री अनुराग सक्सेना को राजस्व अनुविभागीय अधिकारी और अनुविभागीय दंडाधिकारी सौंसर में पदस्थ किया गया है । ये आदेश राजस्व अनुविभागीय अधिकारी सौंसर श्री एम.सिबी. चक्रवर्ती की पदस्थापना अनूपपुर जिले में होने और उन्हें भारमुक्त किये जाने के कारण जारी किये गये हैं ।
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5 हितग्राहियों को एक लाख 6 हजार
250 रुपये की राहत राशि स्वीकृत
सहायक आयुक्त आदिवासी विकास श्री बी.सी.पाण्डे द्वारा अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के अन्तर्गत अत्याचार से पीडित 5 हितग्राहियों को एक लाख 6 हजार 250 रुपये की राहत राशि स्वीकृत की गई है । यह राशि इस अधिनियम के अन्तर्गत गठित जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा पर स्वीकृत की गई है जिसमें अनुसूचित जाति के 3 और अनुसूचित जनजाति के 2 हितग्राही शामिल है ।
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पांढुर्ना में गोटमार मेला सम्पन्न
छिन्दवाड़ा जिला मुख्यालय से 90 किलोमीटर दूर विकासखंड पांढुर्ना में वर्षो से चली आ रही परम्परा का गोटमार मेला सम्पन्न हुआ । इस अवसर पर जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगरपालिका के अधिकारी-कर्मचारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे । गोटमार मेले में लगभग 532 व्यक्ति घायल हुये ।
विकासखंड पांढुर्ना बस्ती के पास से जाम नदी बहती है । नदी के इस तरफ पांढुर्ना एवं नदी के उस पार सांवरगांव है । वैसे दोनों बस्ती पांढुर्ना ही कहलाती है । दोनों बस्ती के बीच में नदी में पोला पर्व के दूसरे दिन प्रात: 5 बजे पलाश की लकडी सहित झंडा लगाया जाता है । यह झंडा बीच नदी में लगाया जाता है । प्रात: 5 बजे से ही पूजन कार्य प्रारंभ कर दिया जाता है । दिन भर एक दूसरे को पत्थरों से मारते है । कई व्यक्ति घायल भी होते है । घायलों का इलाज अस्पताल में किया जाता है । जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा सम्पूर्ण व्यवस्था की देखरेख की जाती है । शाम को पांढुर्ना के लोग झंडा लेने के लिए आते है । सावरगांव एवं पांढुर्ना में लोग मिलकर झंडा उखाडते है और पास के चंडी माता मंदिर में ले जाकर पूजा करते है । दोनों ग्राम के लोग आपस में गले मिलकर गिला-शिकवा दूर करते है । चडी माता मंदिर में घायल व्यक्ति जाकर माता जी का पूजन कर वहाँ की भभूत लगाता है । ऐसा माना जाता है कि भभूत लगाने से वह ठीक हो जायेगा । जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा सम्पूर्ण मेला की व्यवस्था की देखरेख की जाती है ।
पांढुर्ना के गोटमार मेले में प्रशासन की अच्छी व्यवस्था थी । जिला एवं पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मेला स्थल पर अंत तक रहे एवं व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे । नदी के दोनों तरफ अस्थायी रुप से 4 अस्पताल बनाये गये थे जिनमें घायल व्यक्तियों का प्राथमिक उपचार किया जाता रहा । ज्यादा गंभीर व्यक्ति को पांढुर्ना के अस्पताल एम्बूलेंस से भेज दिया जाता था । गोटमार मेले के अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा क्रिकेट, कबड्डी एवं अन्य कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया । मेला शांति पूर्वक सम्पन्न हुआ। इसमें लगभग 379 व्यक्ति पांढुर्ना तथा लगभग 153 व्यक्ति सावरगांव के घायल हुये जिसमें 7 गंभीर घायलों में से 2 गंभीर घायलों को नागपुर रि#ुर किया गया । पांढुर्ना के सामुदायिक भवन में बने 2 अस्पतालों में 354, सावरगांव में बने 2 अस्पतालों में 153 और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में आये 25 घायलों का नि:शुल्क उपचार किया गया ।
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