24 Aug 2011

समाचार 24 Augest 2011


जिला जनसम्पर्क कार्यालय,छिन्दवाड़ा (म.प्र.)
समाचार

पंचायत /नगरपालिका आम निर्वाचन में अधिग्रहित
वाहनों के किराया देयकों का भुगतान शुरु

                पंचायत/नगरपालिका आम निर्वाचन 2009-10 में जिले के विकासखंड परासिया जुन्नारदेव, तामिया, मोहखेड, हर्रई, अमरवाड़ा, सौंसर, पांढुर्ना, चौरई, बिछुआ एवं नगर पंचायत पिपलानारायणवार में अधिग्रहित वाहनों के किराया देयकों का भुगतान किया जा रहा है । जिन वाहन मालिकों के वाहन पंचायत/नगरपालिका आम निर्वाचन 2009-10 में लगे थे वे अपने वाहन की आर.सी. बुक एवं स्वयं के परिचय पत्र के साथ स्थानीय जिला निर्वाचन कार्यालय (स्थानीय निर्वाचन) में कार्यालयीन समय पर उपस्थित होकर वाहन किराया राशि प्राप्त कर सकते हैं। 
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जिले में आज से 8 सितम्बर तक
नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जायेगा
अधिकाधिक व्यक्तियों से नेत्रदान की अपील
            जिला दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत जिले में 25 अगस्त से 8 सितम्बर तक नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जायेगा । कलेक्टर एवं जिला दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार शर्मा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं जिला दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम के उपाध्यक्ष डॉ. चौहान तथा जिला दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम के सचिव एवं नेत्र विशेषज्ञ डॉ. आर.के.गोहिया ने जिले के सभी नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ता आदि से अधिक से अधिक नेत्रदान करने और कराने की अपील की है । उन्होंने कहा है कि नेत्रदान को अपने परिवार की परम्परा बनाये तथा बच्चों को नुकीली चीजों के साथ नहीं खेलने दें । अपने नेत्रदान कर दो अंधे लोगों के जीवन को प्रकाशमान करें तथा कार्निया को जलाने और दफनाने से बचाकर मानवता की सेवा करें । नेत्रदान के लिये जिला अस्पताल के दूरभाष क्रमांक 07162-243446 अथवा स्वयंसेवी श्री रमेश सुखेजा के मोबाईल नंबर 09424961555 या श्री संदीप बत्रा के मोबाईल नंबर 9300304747 पर भी सम्पर्क किया जा सकता है ।
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जल उपभोक्ता संथा निर्वाचन के अन्तर्गत आदर्श आचरण
संहिता का पालन सुनिश्चित कराने एवं करने के निर्देश

                   उप जिला निर्वाचन अधिकारी (ज.उ.सं.नि.)  श्री अनुराग सक्सेना द्वारा जल उपभोक्ता संथा निर्वाचन 2011 के अन्तर्गत जिले के सभी तहसीलदार सह रिटर्निंग आफिसर (ज.उ.सं.नि.) और सहायक निर्वाचन अधिकारी (ज.उ.सं.नि.)  को निर्देश दिये हैं कि जल उपभोक्ता संथा प्रबंध समिति के अध्यक्ष/सदस्य पद के निर्वाचन की 19 अगस्त को जारी सूचना के साथ ही लागू आदर्श आचरण संहिता का पालन सुनिश्चित कराये ओर स्वयं भी पालन करें । इस संहिता में निर्वाचन अपराध और भ्रष्ट आचरण के साथ ही उम्मीदवारों और शासकीय अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए आदर्श आचरण के विभिन्न प्रावधान किये गये हैं । जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री सह नोडल अधिकारी के साथ ही जिले के सभी राजस्व अनुविभागीय अधिकारियों को भी इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं । इन निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में तहसीलदार सह रिटर्निंग आफिसर (ज.उ.सं.नि.)  जुन्नारदेव ने तहसील जुन्नारदेव के सभी कार्यालय प्रमुखों को आदर्श आचरण संहिता का पालन सुनिश्चित कर पालन प्रतिवेदन भेजने के निर्देश दिये हैं ।
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जिले में अभी तक 731.6 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

            जिले में अभी तक 731.6 मि.मी.औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है,जबकि गत वर्ष इस अवधि तक 744.5 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज की गर्ई थी। जिले में पिछले 24 घंटों के दौरान प्रात: 8 बजे तक 10.9 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज की गई है जिसमें विकासखंड छिन्दवाड़ा में 5.8 मि.मी., मोहखेड में 52.4, तामिया में 3, अमरवाड़ा में 13, चौरई में 14.2, हर्रई में 13.4, सौंसर में 4 और पांढुर्ना में 14.2 मि.मी. वर्षा शामिल है।
          अधीक्षक भू-अभिलेख द्वारा बताया गया कि जिले में 24 अगस्त तक 731.6 मि.मी.औसत वर्षा दर्ज की गई है जिसमें विकासखंड छिन्दवाड़ा में 695.6 मि.मी., मोहखेड में 661.6, तामिया में 881, अमरवाडा में 1174.8, चौरई में 623.5, हर्रई में 684.2, सौंसर में 658.2, पांढुर्ना में 741.2, बिछुआ में 458.4, परासिया में 776.8 और जुन्नारदेव में 733.8 मि.मी. वर्षा दर्ज की गई है।
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दो निर्माण कार्य स्वीकृत 

               सांसद श्री कमलनाथ की अनुशंसा पर कलेक्टर द्वारा जारी वित्तीय वर्ष में सांसद स्थानीय निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना के अन्तर्गत जिले के विकासखंड बिछुआ के ग्राम चंद्रिकापुर में यात्री प्रतीक्षालय निर्माण कार्य के लिए 50 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति और 25 हजार रुपये का आवंटन तथा विकासखंड मोहखेड के ग्राम बामला में चबूतरा निर्माण कार्य के लिए 40 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति और 20 हजार रुपये का आवंटन प्रदाय किया गया है । इन निर्माण कार्यो को अक्टूबर माह तक पूर्ण करने के निर्देश क्रियान्वयन एजेंसी को दिये गये हैं ।
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डी.एड. नियमित प्रवेश की काउन्सलिंग 26 अगस्त को

                      जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में 26 अगस्त को प्रात: 11 बजे से डी.एङ नियमित प्रवेश 2011हेतु काउन्सलिंग आयोजित की गई है । इसके लिए वरीयता क्रम में शिक्षकों की सूची डाइट के सूचना पटल पर चस्पा कर दी गई है । संबंधित शिक्षको को मूल दस्तावेजों के साथ निर्धारित तिथि पर काउंसिलिंग के लिए उपस्थित होने के निर्देश दिये गये हैं । शिक्षकों को प्रवेश की चयन सूचना 30 अगस्त को दी जायेगी तथा 5 अगस्त तक प्रवेश की अंतिम तिथि रहेगी ।
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एक निर्माण कार्य के लिए एक लाख रुपये की स्वीकृति प्रदाय

               सांसद स्थानीय निर्वाचन क्षेत्र विकस योजना के अन्तर्गत जारी वित्तीय वर्ष में राज्य सभा सदस्य सुश्री अनुसूईया उईके की अनुशंसा पर कलेक्टर द्वारा जिले के विधानसभा क्षेत्र चौरई के ग्राम खमारपानी के सरस्वती शिशु मंदिर में अतिरिक्त कक्ष निर्माण कार्य के लिए एक लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान करते हुये प्रथम किश्त के रुप में 50 हजार रुपये का आवंटन क्रियान्वयन एजेंसी को प्रदाय किया गया है । इस निर्माण कार्य को मार्च माह तक पूर्ण करने के निर्देश क्रियान्वयन एजेंसी को दिये गये हैं ।
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शांति समिति की बैठक सम्पन्न

                जिले में 30 अगस्त को चांद दिखने पर 31 अगस्त को ईद-उल-फितर का त्यौहार मनाया जायेगा । इसी प्रकार जिले में एक से 12 सितम्बर तक गणेश उत्सव मनाया जायेगा । इन दोनों त्यौहारों को शांतिपूर्वक मनाने के लिए कलेक्टर डॉ. पवन कुमार शर्मा की अध्यक्षता में जिलाध्यक्ष कार्यालय के सभाकक्ष में शांति समिति की बैठक सम्पन्न हुई । बैठक में नगरपालिका उपाध्यक्ष श्री धर्मेन्द्र मिगलानी, समिति के सदस्यगण, पुलिस अधीक्षक डॉ. आशीष, अतिरिक्त कलेक्टर डॉ. श्रीनिवास शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री विनीत जैन, संयुक्त कलेक्टर श्री अनुराग सक्सेना और श्रीमती शुचिस्मिता सक्सेना, राजस्व अनुविभागीय अधिकारी डॉ. के.डी.त्रिपाठी और सभी संबंधित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित थे ।
                बैठक में समिति सदस्यों ने बताया कि ईद-उल-फितर पर बड़ी ईदगाह और जामा मस्जिद में प्रात: 9.30 बजे ओर छोटी ईदगाह में प्रात: 9.45 बजे नमाज अदा की जायेगी । कलेक्टर द्वारा ईद-उल-फितर त्यौहार के दौरान बाजार और नमाज स्थलों, सड़कों, गलियों आदि पर साफ-सफाई, पेयजल आदि की व्यवस्था, सड़कों की मरम्मत, ईदगाह पर पंडाल आदि की व्यवस्था करने के निर्देश मुख्य नगरपालिका अधिकारी को दिये गये । बैठक में समिति सदस्यों ने बताया कि 31 अगस्त की रात्रि और एक सितम्बर की प्रात: तीजा विसर्जन होता है तथा एक सितम्बर से गणेश मूर्तियों की स्थापना होगी । विसर्जन स्थल छोटा तालाब, कुलबहरा नदी, सिंगोडी में पेंच नदी आदि पर 11 सितम्बर को दोपहर से 12 सितम्बर की रात्रि तक मूर्तियों का विसर्जन होगा । कलेक्टर द्वारा मूर्ति विसर्जन मार्गो पर साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, मार्ग के गड्ढों की मरम्मत के साथ ही नाव, गोताखोर और पुलिस की पर्याप्त व्यवस्था रखने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये । विसर्जन के दौरान मोबाईल एम्बुलेंस,फायर ब्रिागेड आदि की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिये गये । समिति सदस्यों द्वारा बताया गया कि ऋषि पंचमी से चतुर्दशी तक जैन समाज का पर्यूषण पर्व भी मनाया जायेगा तथा गणेश मूर्ति विसर्जन के दूसरे दिन शहर के छोटा बाजार और जनपद स्कूल के पास दंगल का आयोजन किया जाता है । कलेक्टर ने पर्यूषण पर्व और दंगल के दौरान सभी आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये । बैठक में विसर्जन के दिन एक दिन शराब की दुकान बंद रखने, डी.जे. पर अश्लील गीत नहीं बजाने और विसर्जन की शोभायात्रा निर्धारित समय पर निकालकर मूर्ति विसर्जन भी समय पर कराने का निर्णय लिया गया । बैठक में प्रमुख स्थलों से अतिक्रमण हटाने का भी निर्णय लिया गया ।
               बैठक में पुलिस अधीक्षक द्वारा थाना स्तर पर सभी मंडलों की बैठक लेकर सार्वजनिक मंडलों के स्वयंसेवकों की सूची देने, मूर्ति पंडाल में स्वयंसेवकों की उपस्थिति और रात्रि में एक कार्यकर्ता के पंडाल में ही सोने, महिला और पुरुषों की भीड़ को नियंत्रित करने की सुचारु व्यवस्था का प्लान बनाने, मूर्ति के आकार के अनुसार शोभायात्रा में वाहन का उपयोग करने आदि की अपेक्षा की गई । बैठक में समिति के सदस्यों ने भी अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किये।
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स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री मोहोड़ का भ्रमण कार्यक्रम

            प्रदेश के स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री श्री नानाभाऊ मोहोड 25 अगस्त को दोपहर 12 बजे भोपाल से प्रस्थान कर ओबेदुल्लागंज, रेहटी, सलनकपुर, बुदनी, होशंगाबाद, पपरिया, मटकुली, देलाखारी, तामिया, परासिया, छिन्दवाडा, रामाकोना होते हुये शाम 6 बजे ग्राम मांगुरली पहुंचकर रात्रि विश्राम करेंगे । आप 26 अगस्त को मांगुरली के निज आवास पर आयोजित पूजा कार्यक्रम में सम्मिलित रहेंगे तथा रात्रि विश्राम यही करेंगे ।
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नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितम्बर पर विशेष:---

महादान नेत्रदान

आलेख – डॉ. आर.के.गोहिया,नेत्र विशेषज्ञ
जिला चिकित्सालय, छिन्दवाड़ा

                      नेत्रदान करने वालों को यह जानना आवश्यक है कि आंख के बाहरी व भीतरी ऊतक (अवयव) जैसे कि कार्निया, लैंस व विट्रीयस मैटर को भोजन व चयापचन हेतु अन्य शारीरिक ऊतकों की तरह खून की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि वे आंख के भीतर से ही निकलने वाले द्रव एक्वश ह्रूमर के द्वारा ही अपना समस्त भोजन प्राप्त करते हैं और जीवन भर पारदर्शी बने रहकर हमें दुनिया दिखाते रहते हैं । कार्निया अर्थात आंख के सामने की पारदर्शी गोलीय परत को मृत्यु के बाद भी शरीर के अन्य अंग जिन्हें हम मनुष्य के जीवित अवस्था में ट्रांसप्लांट करते हैं जैसे किडनी, चमडी, हड्डी, ह्मदय की खून की नलियाँ इत्यादि की तरह मृत्यु उपरान्त निकाल कर जीवित व्यक्ति में लगा सकते हैं ।
                         आँखों के सामने का परदर्शी गोलीय पर्दा जिसे कार्निया कहते हैं, पर चोट लगने, घाव होने अथवा विटामिन “ए”  की कमी होने से यह सफेद होकर अपारदर्शी हो जाता है जिससे मरीज पूर्णत: या अंशत: अंधत्व को प्राप्त होता है । यदि आंख के कार्निया के पीछे के अवयव लैंस, विट्रीयस व रेटिना स्वस्थ हैं, तो कार्निया को बदल देने से वह पुन: देख सकता है । इसके लिये जो नेत्र दानदाता जीवन के दौरान नेत्रदान करते हैं, उनकी आँख मृत्यु पश्चात समय से 4 से 6 घंटों के भीतर निकालकर जहाँ पर कार्निया ट्रान्सप्लान्टेशन ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध हैं, वहाँ मृतक के नेत्रों को कोल्ड चैन मेंटेन करते हुये भेज दी जाती है । वहाँ मृत्यु समय से 24 घंटों के भीतर ही भेजी गई मृत व्यक्ति की दोनों आंखों का कार्निया निकालकर दो पीडित व्यक्तियों की आंख में सफलतापूर्वक प्रतिरोपित कर दिया जाता है, फलत: दो कार्निया अंधत्व से पीडित व्यक्ति पुन: देखने लग जाते हैं ।
                हमारे देश में लगभग 2 लाख से अधिक कार्निया अंधत्व से पीडित मरीज हैं और हर वर्ष इनकी संख्या बढ़ते ही जाती है । लगभग 36 से 40 हजार कार्निया ही प्रतिवर्ष नेत्रदान से प्राप्त होता है । फलत: शेष पीडित व्यक्ति को प्रतिरोपण हेतु कार्निया उपलब्ध नहीं रहती है और वे दृष्टिहीन रहने को ही मजबूर रहते हैं । दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितम्बर तक प्रतिवर्ष मनाया जाता है जिसमें देश में नेत्रदान का प्रचार-प्रसार कर इसके बारे में जानकारी दी जाती है । नेत्रदान हेतु फार्म भरवाये जाते हैं ताकि अधिकाधिक व्यक्ति मृत्यु उपरान्त नेत्रदान करें और कार्निया अंधत्व से पीडित अंधत्व में कमी लाई जा सके ।
                  जिन नेत्र दानदाताओं ने अपनी आंखे दान की हुई हैं या जिनके रिश्तेदार अपने मृतक संबंधी की आंखें दान करना चाहते हैं, वे अपने स्वजन की मृत्यु की खबर नेत्रदान कराने वाले स्वयंसेवी व्यक्तियों को, नेत्र सहायक को या नेत्र विशेषज्ञों को जितनी जल्दी हो खबर करें ताकि वे मृत्यु उपरान्त 4 से 6 घंटे के भीतर आंख निकाल कर उचित समय पर उचित स्थान पर भेज सकें । मृतक की आंखों की कार्निया हवा एवं गर्मी से खराब होने लगती है, उस पर सफेदी आने लगती है, इसलिए मृतक के कमरे का पंखा व बल्ब इत्यादि बंद कर देना चाहिये। आंख पर बर्फ के टुकडे रख सकते हैं या आंख में एंटीबायोटिक नेत्र की दवा-आई ड्राप्स डाल सकते है या आंखें बंद कर दें । जीवित व्यक्ति तो आंख को बार-बार पलक झपक कर गीला करते रहता है ताकि उसका कार्निया खराब न हो, किन्तु मृतक हेतु यह कार्य संबंधियों द्वारा ही किया जाये। इसी के साथ ध्यान देने योग्य बात यह है कि नेत्र निकालने के बाद चेहरे पर कोई कुरुपता या भद्दापन नहीं दिखाई पड़ता, क्योंकि नेत्र सर्जन द्वारा आंख के खाली स्थान में कपास भर कर आंख की पलके बंद कर दी जाती हैं । साथ ही सेंपल के तौर पर नेत्रदान दाता का थोडा सा रक्त भी नेत्रों के साथ हितग्राही से मैचिंग या मिलान हेतु भेजा जाता है ।
                   नेत्रदान करने वाले दानदाता की मृत्यु किसी ऐसी बीमारी के फलस्वरुप नहीं हुई होनी चाहिये जिस बीमारी का हितग्राही (जिसे कार्निया लगाना हो) को फैलने का खतरा हो जैसे कि एड्स, रेबीज, इन्सेफेलाइटिस, मैनिनजाइटिस, हिपेटाइटिस, सेप्टीसीमिया, आंखों का या आंखों के आसपास का कैंसर, आंखों की गम्भीर बीमारी, केरेटोकोनस तथा एण्डोधीनियल डिस्ट्राफी इत्यादि नहीं होना चाहिये । ऐसी बीमारियों से ग्रसित नेत्रदाता का कार्निया प्रत्यारोपण हेतु उपयोग में नहीं लाया जाता है ।
               नेत्रदान के उपरान्त सिर्फ कार्निया ही बदली जाती है जिसे कार्नियल ग्राÏफ्टग (केरेटोप्लास्टी) कहते हैं । पूरी आंख नहीं बदली जाती । यह भी दो प्रकार का होता है । पहला पूरी मोटाई की कार्निया ग्राÏफ्टग या फुल थिकनेस कार्निया ग्राÏफ्टग और दूसरा हाफ थिकनेस (आधी मोटाई की) कार्निया ग्राÏफ्टग या कार्निया ट्रांसप्लान्टेशन । कार्नियल प्रत्यारोपण का इतिहास देखने पर नेत्र सर्जनों ने 18 वीं सदी के उत्तराद्र्ध में 1852 से इसकी शुरुआत कर विभिन्न प्रयोग किये, परन्तु मनुष्य में पहली बार सफल कार्निया प्रत्यारोपण का श्रेय वॉन हिप्पल नामक नेत्र सर्जन को 1888 में कार्निया प्रत्यारोपण करने पर मिला । कार्निया की गुणवत्ता में कम उम्र के मनुष्य का कार्निया, कार्निया के पीछे तक एण्डोथीलियल में उनके सेल्स की गिनती ज्यादा होने से प्रत्यारोपण हेतु अच्छी मानी जाती है और मृत्यु उपरान्त 4 घंटे के भीतर नेत्रदान किये जाने पर हितग्राही की नजर में अच्छे परिणाम प्राप्त हुये इसीलिए एक्सीडेंटल मृत्यु उपरान्त कार्निया के सर्वोत्तम परिणाम पाये गये हैं । वर्तमान समय में ऐसे आदर्श मटेरियल की खोज जारी है जिससे सफल कार्निया बनाकर आंख में लगाया जा सके और प्रत्यारोपण उपरान्त कॉम्पलीकेशन नगण्य हो । इसी के इंतजार में हम सबको तब तक नेत्रदान करने का संकल्प लेना होगा ताकि संसार में मानव कार्नियल अंधत्व से पीडित न रहे। सभी लोग नेत्रदान कर अपनी आंखों को अमर बना सकते हैं । 

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